देहरादून: प्रदेश सरकार पारदर्शी और जवाबदेह शासन की दिशा में लगातार ठोस व निर्णायक कदम उठा रही है। इससे वह यह साबित कर चुकी है कि राज्य को भ्रष्टाचार मुक्त बनाना और प्रशासन में जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। यही कारण है कि सरकार ने आइएएस अधिकारियों से लेकर पीएस अधिकारियों और भ्रष्ट कार्मिकों पर लगातार प्रहार किया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार जीरो टालरेंस की नीति पर आगे बढ़ रही है। इसके तहत अब तक भष्टाचार पद के दुरुपयोग, आय से अधिक संपत्ति और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर कार्रवाई की गई है। इसमें हरिद्वार भूमि घोटाला प्रकरण भी जुड़ गया है।
इससे पहले सरकार आय से अधिक संपत्ति के मामले में आइएएस रामविलास यादव पद का दुरुपयोग व आय से अधिक संपत्ति के मामले में आइएफएस किशन चंद, परीक्षा धांधली में पूर्व आइएफएस व यूकेएसएसएससी के चैयरमैन आरबीएस रावत बागवानी में वित्तीय अनियमिताओं पर उद्यान निदेशक हरमिंदर सिंह बवेजा भ्रष्टाचार संबंधी आदेशों की व वित्तीय नियमों की अनदेखी करने पर वित्त नियंत्रक अमित जैन रिश्वत लेने के आरोप में उप महाप्रबंधक वित्त भूपेंद्र कुमार, भ्रष्टाचार की शिकायतों पर पीसीएस निधि यादव रिश्वत लेते पकड़े जाने पर लेखपाल महिपाल सिंह स्टांप शुल्क व भूमि पंजीकरण में अनियमितताओं पर उप निबंधक रामदत्त मिश्र के साथ ही राज्य कर विभाग के अधिकारियों पर भी लापरवाही व भ्रष्टाचार की शिकायतों पर कार्रवाई कर चुकी है। यहां तक की सरकार ने सेवानिवृत्त अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की है।
सरकार राज्य में आयोजित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में नकल और पेपर लीक जैसे मामलों को गंभीरता से लिया है। अभी तक 57 नकल माफिया जेल भेजे जा चुके हैं। 24 आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।
