रानीचौरी (टिहरी गढ़वाल)। वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली उत्तराखण्ड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार के कुलपति डॉ. भगवती प्रसाद भट्ट के दिशानिर्देशन तथा वानिकी एवं पर्वतीय कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. तारा सिंह मेहरा के मार्गदर्शन में पादप रोग विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण कार्यक्रम का मंगलवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम हिम्मोत्थान सोसायटी, देहरादून (टाटा ट्रस्ट की एक पहल) के सहयोग से “कृषि एवं बागवानी फसलों में जैविक प्रणाली के अंतर्गत समेकित पादप रोग एवं कीट प्रबंधन” विषय पर आयोजित किया गया।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि जिला उद्यान अधिकारी, टिहरी गढ़वाल, श्री पंकज कुमार पटवाल ने कहा कि वैज्ञानिक एवं पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाकर किसान अपनी उत्पादन क्षमता और आय दोनों में वृद्धि कर सकते हैं। उन्होंने किसानों से प्रशिक्षण में प्राप्त तकनीकों को अपने खेतों में अपनाने और अन्य किसानों को भी इनके प्रति जागरूक करने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित ऐसे किसान-केंद्रित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि ये कृषि एवं उद्यानिकी के सतत विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम समन्वयक एवं पादप रोग विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. लक्ष्मी रावत ने बताया कि तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान किसानों को जैविक खेती, समेकित पादप रोग एवं कीट प्रबंधन, जैव-नियंत्रण एजेंटों के उपयोग, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, फल एवं कृषि फसलों की वैज्ञानिक सुरक्षा सहित नवीनतम तकनीकों की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में व्यावहारिक प्रदर्शन और प्रक्षेत्र भ्रमण भी कराया गया, जिससे किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हुआ।
डॉ. लक्ष्मी रावत ने कार्यक्रम की सफलता के लिए कुलपति डॉ. भगवती प्रसाद भट्ट, अधिष्ठाता डॉ. तारा सिंह मेहरा, निदेशक शिक्षा डॉ. अरविन्द बिजल्वाण, हिम्मोत्थान सोसायटी, विषय विशेषज्ञों, आयोजन समिति तथा प्रशिक्षण में सहभागी किसानों का आभार व्यक्त किया।
सह-समन्वयक डॉ. तौफीक अहमद और डॉ. अंकित टम्टा ने भी प्रशिक्षण को सफल बनाने में सहयोग देने वाले वैज्ञानिकों, अधिकारियों, कर्मचारियों और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
प्रशिक्षण में विभिन्न जनपदों से आए चयनित किसानों ने तकनीकी सत्रों, प्रयोगात्मक प्रदर्शनों और संवादात्मक चर्चाओं में सक्रिय भागीदारी की। समापन अवसर पर प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। किसानों ने भविष्य में भी इस प्रकार के व्यवहारिक एवं किसान-केंद्रित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की अपेक्षा जताई। वैज्ञानिक एवं टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के सामूहिक संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
