ऋषिकेश: नैसर्गिक सौंदर्य व साहसिक खेलों के लिए विख्यात ऋषिकेश में कूड़े का पहाड़ शहरवासियों के लिए अभिशाप बनता जा रहा है।
करीब 40 से 45 मीटर ऊंचे इस कूड़े के ढेर की गंगा नदी से दूरी महज 250 मीटर है। यह पर्यावरण व पर्यटन के लिए गंभीर संकट तो बन ही रहा है साथ ही इस क्षेत्र की परिधि में बसी हजारों की आबादी के लिए सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है।
दुर्भाग्य से बीते दो से तीन दशकों में इस कूड़े के निस्तारण को न अधिकारियों ने गंभीरता दिखाई न जन प्रतनिधियों ने। इसी का परिणाम है कि यह कम होने के बजाय ऊंचा ही होता गया। अब देर सवेर सिस्टम नींद से जागा है लेकिन अब विशाल पहाड़रूपी कूड़े के ढेर का निस्तारण गले की फांस बन रहा है।
देश में स्वच्छ भारत अभियान चल रहा है। ऋषिकेश में कूड़ा निस्तारण को लेकर नगर निगम ने दैनिक उत्पन्न हो रहे कूड़े के निस्तारण के लिए कूड़ा पृथककरण व थ्री-आर जैसी प्रभावी विधियां तो अपना ली हैं लेकिन शहर में पिछले तीन दशक से डंप हो रहे कूड़े का निस्तारण करना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। कई मीटर ऊंचाई तक जमा कूड़े का पृथककरण नहीं हो पा रहा है। जिससे कूड़े का प्रभावी निस्तारण करना मुश्किल हो रहा है।
दरअसल ऋषिकेश शहर के मध्य बसे गोविंद नगर में नगर निगम ने कूड़ा घर बनाया है। समीप बसे गोविंद नगर, बनखंडी, तिलक रोड, गंगा नगर, हरिद्वार रोड सहित कई वार्डों के लिए कूड़ा घर अभिशाप बना हुआ है। इनकी आबादी करीब 1500 से अधिक है। सामान्य दिनों में भी कूड़े घर से चलने वाली दुर्गंध इन क्षेत्रों में पहुंचती रहती है। इससे पूरे परिवार खासा प्रभावित होते हैं। वहीं वर्षाकाल में कूड़ा गीला होने के कारण अधिक दुर्गंध छोड़ता है। क्षेत्रवासी नगर निगम की ओर से ठोस प्रबंध नहीं होने से खासा रोष में हैं।
