देहरादून: दून समेत ज्यादातर क्षेत्रों में मौसम शुष्क बना हुआ है और पहाड़ से लेकर मैदान तक तपने लगे हैं। ज्यादातर क्षेत्रों में पारा चढ़ने लगा है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अप्रैल में झुलसाने वाली गर्मी बेहाल कर सकती है।
बीते मार्च में भले ही प्रदेश में औसत वर्षा सामान्य से पांच प्रतिशत अधिक रही हो लेकिन मैदानी क्षेत्रों में वर्षा काफी कम हुई। खासकर हरिद्वार में सामान्य से आधी भी बारिश नहीं हुई। ऐसे में यहां मौसम अधिक शुष्क रहने और तपिश बढ़ने की आशंका है।
उत्तराखंड में बीते दो माह बारिश तो संतोषजनक रही लेकिन वर्षा का अनियमित पैटर्न चिंता का विषय बन गया है। कहीं सामान्य से अधिक तो कहीं कम वर्षा के कारण मौसम का मिजाज बदला-बदला है।
इस बार लगातार दूसरे साल जनवरी में न के बराबर वर्षा हुई और पूरा माह लगभग सूखा बीता। जिससे मौसम शुष्क बना रहा और पारा भी सामान्य से अधिक रहने से समय से पहले ही मौसम गर्म होने लगा।
फरवरी की शुरुआत भी इसी प्रकार की रही और पूरे तीन सप्ताह तक वर्षा-बर्फबारी न के बराबर हुई। हालांकि अंतिम दो दिन में प्रदेश में भारी वर्षा-बर्फबारी और ओलावृष्टि हुई। जिससे माह का औसत बढ़ गया।
दून में वर्ष 1961 के बाद फरवरी में सर्वाधिक वर्षा हुई है। इसके बाद एक मार्च से शुरू ग्रीष्मकाल में अब तक सामान्य से पांच प्रतिशत अधिक वर्षा हुई। हालांकि मार्च में भी मौसम में उतार-चढ़ाव रहा।
टिहरी में सर्वाधिक वर्षा हुई जबकि हरिद्वार में सबसे कम बारिश दर्ज की गई। देहरादून में भी सामान्य से कम वर्षा रही जिससे यहां अप्रैल खासा गर्म रहने का अनुमान है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल प्रदेश में वर्षा के आसार नहीं हैं ऐसे में पारे में तेजी से वृद्धि हो सकती है। कम वर्षा वाले जिलों में मौसम अधिक शुष्क रहने से तपिश के साथ झुलसाने वाली गर्मी महसूस की जा सकती है।
मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह के अनुसार प्रदेश में फिलहाल मौसम शुष्क बना रहने के आसार हैं। उत्तरकाशी, चमोली, बागेश्वर आदि में आंशिक बादल मंडरा सकते हैं। ज्यादातर क्षेत्रों में तापमान में वृद्धि हो सकती है। दून में अधिकतम तापमान सामान्य से तीन डिग्री सेल्सियस अधिक बना हुआ है जिसमें और बढ़ोतरी हो सकती है।
