देहरादून। उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में पिछले कुछ सप्ताह से मानव-भालू संघर्ष के लगातार बढ़ते मामलों ने ग्रामीणों में गहरी दहशत पैदा कर दी है। विशेषकर उत्तरकाशी के मोरी ब्लॉक, टिहरी के यमकेश्वर ब्लॉक और चमोली जनपद के कई गांवों में भालू के बढ़े हुए आक्रामक व्यवहार ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। ताजा घटनाओं में मोरी ब्लॉक के गोविंद वन्यजीव विहार पार्क क्षेत्र के जखोल गांव के जाबिल्च तोक में गुरुवार देर रात भालू ने कई घरों और छानियों के दरवाजे तोड़ डाले। अचानक हुए इस हमले से ग्रामीणों में अफरातफरी मच गई और पूरी बस्ती भय के साये में पूरी रात जागती रही। ग्रामीणों ने बताया कि भालू कई दिनों से गांव के आसपास घूम रहा था और पहले भी जंगलों में लोगों तथा मवेशियों पर हमला कर चुका है। लेकिन रात में बस्ती में घुसने के बाद उसने जिस तरह कई घरों के दरवाजे तोड़ डाले, उससे ग्रामीणों में असुरक्षा की भावना और अधिक गहरी हो गई है।
गांव के गंगा सिंह रावत, धाम सिंह, गौर सिंह, जगदीश, ताली राम, जयेंद्र सिंह, राजी सिंह, भगवान सिंह और फागणु ने बताया कि भालू के हमलों की संभावना पहले से थी, लेकिन देर रात जब उसने बस्ती के अंदर कई छानियों और घरों के दरवाजे उखाड़े, तो ग्रामीण डर से घरों के भीतर कैद होकर रह गए। भालू के शोर और दरवाजे टूटने की आवाजें पूरी रात सुनी जाती रहीं। ग्रामीणों का कहना है कि भालू का व्यवहार बेहद आक्रामक हो चुका है और यदि समय रहते वन विभाग ने कार्रवाई नहीं की तो किसी बड़ी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता। स्थानीय लोगों ने वन विभाग से तुरंत टीम भेजने और भालू को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर ले जाने की मांग की है।
इस घटना की सूचना मिलने पर पार्क की उप निदेशक निधि सेमवाल ने बताया कि रेंज अधिकारी गौरव अग्रवाल के नेतृत्व में वनकर्मियों की टीम मौके पर भेजी गई है। टीम नुकसान का आकलन कर रही है और सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी भी बढ़ा दी गई है। विभाग ने आश्वासन दिया है कि रिपोर्ट आने के बाद प्रभावित ग्रामीणों को मुआवजा दिया जाएगा।
इधर, यमकेश्वर ब्लॉक के सार गांव में भी भालू की दहशत लगातार बनी हुई है, जहां पिछले दस दिनों में तीन गाय और एक बछड़ा भालू ने मार डाला है। ग्राम प्रधान कृष्णा नेगी और सामाजिक कार्यकर्ता विनय नेगी ने बताया कि शुक्रवार तड़के करीब तीन बजे भालू ने पशुपालक भोला दत्त की गोशाला का दरवाजा तोड़कर वहां बंधी गाय को मार डाला। इससे पहले भी गांव में भालू ने दो अन्य गोशालाओं में घुसकर मवेशियों को मार डाला था। ग्रामीणों ने वन विभाग से सुरक्षा बढ़ाने और प्रभावित पशुपालकों को मुआवजा दिलाने की मांग की है। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और लालढांग रेंज के रेंजर अनुराग जोशी ने बताया कि इलाके में गश्त बढ़ा दी गई है तथा मुआवजे के लिए रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है।
चमोली जिले में भी भालू के हमलों में कमी नहीं आई है। गुरुवार रात को भालू ने स्यूंण गांव में एक गोशाला तोड़कर गाय को मार डाला। ग्रामीणों ने बताया कि वे देर रात तक पटाखे जलाकर भालू को दूर रखने की कोशिश करते रहे, लेकिन जैसे ही पटाखे बंद हुए, भालू गांव में आ गया। इसके अलावा नंदानगर के महड़ बगठी गांव में भी भालू ने रघुवीर लाल की गोशाला तोड़कर दो बैलों को मार डाला। ग्राम प्रधान गौरव सती के अनुसार गांवों में दहशत का माहौल है और ग्रामीण रातभर जागने को मजबूर हैं।
उत्तरकाशी जिले के कैलसु, रैथल और बाडागड्डी क्षेत्रों में भी लगातार भालू दिखने और ग्रामीणों तथा मवेशियों पर हमले की घटनाएं बढ़ रही हैं। इससे परेशान होकर ग्रामीणों ने वन विभाग कार्यालय में प्रभागीय वन अधिकारी से मिलकर भालू की दहशत खत्म करने की मांग की। उनका कहना है कि भालू के भय से लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं और सामान्य दिनचर्या भी बाधित हो रही है।
लगातार बढ़ रहे इन घटनाक्रमों ने वन विभाग को भी सतर्क कर दिया है। संबंधित क्षेत्रों में गश्त बढ़ा दी गई है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि स्थिति अब नियंत्रण से बाहर होती जा रही है। उनका अनुरोध है कि भालू को पकड़ने, स्थानांतरित करने या अन्य प्रभावी कदम उठाने के लिए विभाग तुरंत ठोस कार्रवाई करे, ताकि ग्रामीण अपनी सुरक्षा और जीवनयापन के प्रति निश्चिंत हो सकें।
