उत्तराखंड। उत्तराखंड में भवन स्व-गणना की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आज से जनगणना का अगला चरण शुरू हो गया है। अब प्रगणक (एन्यूमरेटर) घर-घर जाकर मकानों पर नंबर लिखेंगे और परिवार से संबंधित जानकारी एकत्र करेंगे।
जनगणना निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव के अनुसार, 10 अप्रैल से 23 अप्रैल के बीच राज्य में 62,000 से अधिक लोगों ने डिजिटल माध्यम से स्व-गणना पूरी की। इसमें देहरादून जिला सबसे आगे रहा, जहां 10,884 लोगों ने खुद से अपनी जानकारी दर्ज की।
पूरे राज्य को 29,567 हाउस लिस्टिंग ब्लॉक्स में बांटा गया है, जिनके डिजिटल मानचित्र भी तैयार किए गए हैं। इनका उपयोग प्रगणक अपने क्षेत्र में कार्य के दौरान करेंगे। जनगणना को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए 20,859 प्रगणक और 3,670 पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए हैं, जिन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
हर घर पहुंचेंगे प्रगणक, 33 सवाल पूछे जाएंगे
प्रगणक हर उस घर में जाएंगे जहां कोई व्यक्ति रह सकता है। वे मकान पर नंबर अंकित करेंगे और यह जानने की कोशिश करेंगे कि वह आवासीय है या नहीं। यदि घर में लोग रहते हैं, तो वहां 33 सवाल पूछे जाएंगे। यह पूरी प्रक्रिया 24 मई तक पूरी की जानी है।
मना करने पर हो सकती है कार्रवाई
प्रगणकों को कानूनी अधिकार प्राप्त हैं, इसलिए कोई भी व्यक्ति उन्हें जानकारी देने या मकान पर नंबर लिखने से मना नहीं कर सकता। गलत जानकारी देने पर कार्रवाई हो सकती है और दुर्व्यवहार करने पर एफआईआर भी दर्ज की जा सकती है।
टोल-फ्री नंबर से मिलेगी जानकारी
जनगणना से संबंधित किसी भी जानकारी या शिकायत के लिए 1855 टोल-फ्री नंबर जारी किया गया है। इस नंबर के माध्यम से लोग अपने क्षेत्र के प्रगणक की जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं।
प्रगणक अपने पहचान पत्र और क्यूआर कोड के साथ आएंगे। वे पहले स्थानीय जनप्रतिनिधियों से संपर्क करेंगे और उसके बाद घर-घर जाकर जनगणना का कार्य पूरा करेंगे। पुलिस और प्रशासन को भी इस प्रक्रिया को लेकर सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
